ज़ुल्म ही ज़ुल्म लखीमपुर से अम्बाला तक डाक्टर सलीम खान

ज़ुल्म ही ज़ुल्म
लखीमपुर से अम्बाला तक
डाक्टर सलीम खान

लखीम पूर की गर्द अभी बैठी भी नहीं थी कि हरियाणा के अम्बाला में इसी तरह का एक वाकिया हो गया । वहां पर एमपी नायब सिंह सैनी के बेटे ने नहीं बल्कि उनके क़ाफिले में शामिल एक गाड़ी ने किसान को टक्कर मार दी। इस हादिसा में जख्मी होने वाले किसान को फौरी तौर पर अस्पताल में दाखिल करना पड़ा। इस के बाद किसानों का वहां जमा होना एक फित्री अमल था। इसलिए पुलिस फोर्स तैनात करके हालात को काबू में रखने की कोशिश की गई लेकिन सवाल ये है कि आखिर ये नाखुशगवार वाकिया क्यों पेश आया? इस का लखीम पूर सानिहा से क्या ताल्लुक है? और आइन्दा ऐसे वाक़ियात को होने से कैसे रोका जा सकता है? लखीम पूर में मंत्रीे के बेटे की गाड़ी का किसानों पर चढ़ाना जगजाहिर है। इस के बाद चार दिनों में अगर मंत्री से इस्तीफा ले लिया जाता और बाप बेटों को जेल की सलाख के पीछे भेज दिया जाता तो ये वाकिया हरगिज नहीं होता लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। जिन लोगों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई उनमें से दो को तफतीश के लिए हिरासत में लिया गया और आशीष मिश्रा के खिलाफ समन जारी हुआ। इस तरह की नरमी का प्रदर्शन इस पुलिस की ओर से हो रहा है जो मौलाना कलीम सिद्दीकी तो दूर प्रियंका गांधी को भी बिना कागजात के हिरासत में लेने के बाद गिरफ्तारी दिखाती है। इस तरह की जानिंबदारी के नतीजे में सत्ताधरी पार्टी का हर एमपी ऐसा जुल्म करता फिरे तो ये कोई हैरत की बात नहीं होगी।
अम्बाला के सानिहा की तफसील इस तरह है कि नारायण गढ़ के सैनी धर्मशाला में कुरूक्षेत्र से एमपी नायब सिंह सैनी शिरकत की गरज से पहुंचे। इस प्रोग्राम की खबर जब किसानों को मिली तो वो एहतिजाज के लिए जमा होना शुरू हो गए। ऐसे में जाहिर है किसानों के विरोध को काबू में रखने के लिए पुलिस भी पहुंच गई। वो तक़रीब बख़ैर व खूबी हो गई और इस के बाद एमपी सैनी अपने क़ाफिले समेत लौटने लगे । इस दौरान एहतिजाज करने वाला एक किसान गाड़ी के सामने आ गया। ऐसे में होना तो ये चाहिए था कि ब्रेक मार कर किसान को बचाया जाता। इस के बरखिलाफ क़ाफिले की एक गाड़ी ने किसान को टक्कर मार दी और वो जख्मी हो गया। किसानों का इल्जाम है कि हत्या के इरादे से गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की गई। भारतीय किसान यूनीयन चढवनी ग्रुप ने नारायण गढ़ थाना में इस ताल्लुक से शिकायत दर्ज करा दी लेकिन इस से क्या होता है ?
लखीम पूर और हरियाणा के वाकिया में भाजपा नेताओं ने यकसां मौकिफ इखतियार किया। लखीम पूर में मिश्रा ने कह दिया कि उनका बेटा जााए वारदात पर मौजूद ही नहीं था जबकि वीडीयो के अलावा उनके एक हामी की वीडीयो भी मंजरे आम पर आ चुकी है जिसमें वो आशीष भैया के मौजूद होने की गवाही देता है। एमपी नायब सिंह सैनी ने उल्टा किसानों को हमलावर करार देकर कहा दंगाइयों ने मेरे ड्राईवर का गला पकड़ लिया। मुझ पर हमला किया गया। सैनी के मुताबिक किसानों ने कहा एमपी की गाड़ी है भाग कर पीछे से हमला करो। यहां तक तो झूठ चल भी जाता मगर आगे कहते हैं जब किसान गाड़ी के नीचे आने के लिए जबरदस्ती करने लगे तो अमला ने पीछे वाली खिड़की खोल कर उन्हें दूर ढकेला। इस तरह गोया पहले तो वो हमलावर दंगाई थे अब गाड़ी के नीचे आने के लिए जबरदस्ती करने वाले बन गए। वो ये भी कहते हैं किसी भी किसान को इस की गाड़ी से चोट नहीं लगी । सवाल ये है कि फिर जो किसान अस्पताल में है इस को किस ने जख्मी किया ? और अगर किसानों ने उन पर हमला किया तो वो ख़ुद जख्मी क्यों नहीं हुए?
नायब सिंह सैनी ने सबूत के तौर पर वीडियो पेश करने का मुतालिबा किया और वो सोश्यल मीडिया में आ गई। इस वीडियो से ये भी साबित हो गया कि नायब सिंह सैनी के ड्राईवर राजीव ने ही किसानों पर तेजी से गाड़ी चढ़ाई और जिस गाड़ी ने किसान को टक्कर मारी है वो एमपी के नाम से रजिस्टर है यानी उनकी अपनी मिल्कियत है। नायब सिंह सैनी के साथ किसानों की अनबन नई नहीं है । अभी एक माह पहले उन्होंने कहा था कि पूरा देश जानता है दिल्ली में जारी किसान तहरीक को कांग्रेस ने मुनज्जम किया है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अरमेन्द्र सिंह के बयान से ये बात बिलकुल साफ हो चुकी है। सैनी ने कैप्टन पर इल्जाम लगाया था कि उन्हों किसानों को हिदायत की कि वो पंजाब के बजाय हरियाणा और दिल्ली में जाकर एहतिजाज करें ताकि वहां का मआशी नुकसान हो। इस से ये बात जाहिर हो गई कि किसान तहरीक कांग्रेस की साजिश है।
इस बात को अगर सही मान लिया जाये तो सैनी को ये बताना होगा कि कांग्रेस ने तो इस हिदायत के जारी करने वाले मुख्यमंत्री को हटा दिया मगर अब अमित शाह उनके साथ पेंगें बढ़ा रहे हैं तो क्या वो अब कैप्टन की मदद से हरियाणा और दिल्ली की मईशत को तबाह करना चाहते हैं । इस बात का इमकान है भाजपा पंजाब में कैप्टन अरमेन्द्र सिंह को राम विलास पासवान की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश करे ताकि कांग्रेस को कमजोर किया जा सके लेकिन इस हिक्मते अमली का उसे ना तो बिहार में फायदा हुआ और ना पंजाब में होगा । सैनी के बयान से ये भी पता चलता है कि ऊटपटांग इल्जामात किस तरह लौट कर ख़ुद अपने सर पर आ जाते हैं। भाजपा वाले अगर ये समझते हैं कि इस तरह वो किसानों की हौसा शिकनी कर सकेंगे तो ये उनकी गलतफहमी है।
किसानों के हवाले से हरियाणा के मुख्यमंत्री की वीडियो पर अपने लोगों लाठी के जोर से प्रदर्शनकारियों को मार भगा ने की तरगीब देते हैं जो भाजपा की जेहनियत का पर्तो है। यही वजह है कि अम्बाला या लखीम पूर वाकिया पर भाजपा का कोई अहम नेता तफसीली बयान नहीं दिया और ना निंदा करता है। इस मामले में भाजपा के एमपी वरूण गांधी अपवाद हैं जो एक जमाने में मुसलमानों को तलवार दिखा कर डराते थे। उन्हों अपनी सरकार को तन्क़ीद का निशाना बना या तो भाजपा ने वालिदा समेत उनको 80 रुकनी मजलिसे आमला में शामिल नहीं किया। मेनका गांधी एक जमाने में केंद्रीय मंत्री थीं और वरूण गांधी को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया जाता था अब उन्हें किसानों के हक में आवाज बुलंद करने की सजा दी जा रही है। वरूण गांधी का क़सूर ये है कि उन्होंने किसानों पर गाड़ी चढ़ाने वाली वीडियो शेयर करके ट्वीट किया ये वीडियो बिलकुल शीशे की तरह साफ है। प्रदर्शनकारियों का हत्या कर के इन को खामोश नहीं करा सकते हैं। बेक़सूर किसानों का खून बहाने के वाकिया के लिए जवाबदेही तै करनी होगी। इस से पहले कि हर किसान में इश्तिआल और बेरहमी का जजबा घर बनाए, उन्हें इन्साफ दिलाना होगा। वरूण गांधी की बातें इस बात का इशारा है भाजपा में मजलूम की हिमायत जुर्म अजीम है।

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