शिव भोजन थाली मांग के अनुरूप उपलब्ध कराए सरकार: एम पी जे

शिव भोजन थाली मांग के अनुरूप उपलब्ध कराए सरकार: एम पी जे
मुंबई: महाराष्ट्र में कोरोना का तांडव जारी है. मौत के आंकड़े डराने वाले हैं. पिछले 2 महीनों में 36000 से भी ज्यादा लोग अपनी जानें गँवा चुके हैं. प्रदेश में 18 जिले अभी भी रेड ज़ोन में हैं. कोरोना संक्रमण के चेन को तोड़ने हेतु सरकार ने गत वर्ष की भांति लॉकडाउन का सहारा लिया है. सरकार की मानें तो लॉकडाउन की वजह से प्रतिदिन संक्रमण के केसों में कमी हो रही है. भले ही सरकार को लॉकडाउन नाम की कड़वी दवा का सकारात्मक प्रभाव नज़र आ रहा हो, लेकिन इसके साइड इफेक्ट्स भी कोरोना से कम डरावने नहीं हैं.
लॉकडाउन ने पहले से ही मंदी की मार झेल रहे अर्थव्यवस्था पर बड़ा ही नकारात्मक प्रभाव डाला है. जी डी पी और विकास दर की बातें तो जाने दीजिए, इस की वजह से लाखों लोगों के सामने दो वक़्त की रोटी का जुगाड़ करना एक बड़ी चुनौती बन गई है. प्रदेश में लाखों लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है. एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है कि, लॉकडाउन की वजह से तकरीबन 84 प्रतिशत उच्च आय वर्ग (HIG) के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है. जब उच्च आय वर्ग के लोगों की ये हालत है तो मध्यम और निम्न आय वर्ग की हालत का बखूबी अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
लॉकडाउन की वजह से आर्थिक तंगी की सब से ज़्यादा मार तो ग़रीब, दिहारी मज़दूर और अनौपचारिक वर्ग के कामगारों को झेलना पड़ रहा है. आबादी के एक बड़े तबक़े के सामने भूखमरी की स्थिति पैदा हो गई है. सरकार ने लॉकडाउन में गरीबों को राहत पहुँचाने के लिए शिव भोजन थाली को मुफ़्त कर दिया है. 13 अप्रैल 2021 को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ग़रीब और ज़रूरतमंद लोगों को शिव भोजन थाली योजना के द्वारा कोरोना काल में भोजन उपलब्ध करने की घोषणा की थी. बता दूं कि, कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रधान मंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि, उन्हों ने तो लोगों से सिर्फ थाली बजवाई थी, हम लोगों को थाली दे रहे हैं. लेकिन ये शिव भोजन थाली योजना भी एक लोकलुभावन योजना साबित हो रही है. इस बात का खुलासा प्रदेश में सालों से जन हित की लड़ाई लड़ रही जन आन्दोलन मुव्हमेंट फॉर पीस एंड जस्टिस (एम पी जे) के द्वारा किये गए एक सर्वे के बाद हुआ है.
आप को बता दें कि एम पी जे ने अपने सर्वे में पाया कि, जिस शिव भोजन थाली योजना के तहत कोरोना काल में गरीबों के पेट भरने को लेकर मुख्य मंत्री अपनी पीठ थप थपा रहे हैं, वास्तव में यह योजना केवल एक ढकोसला भर है. एम पी जे के एक पदाधिकारी रमेश कदम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, ये योजना प्रदेश में केवल 890 शिव भोजन केन्द्रों के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है और गिनती के लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. इस योजना के तहत प्रति दिन दो लाख थाली वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है, जो नाकाफी है. उन्हों ने कहा कि, आप मुंबई को ही ले लीजिये, जहाँ आज सत्तर प्रतिशत आबादी को भोजन चाहिए, वहां कुल तिहत्तर केन्द्रों के द्वारा प्रतिदिन मात्र सत्रह हज़ार थाली वितरित किया जा रहा है. इस से स्पष्ट हो जाता है कि, ये योजना केवल दिखावा है. लॉकडाउन की वजह से ग़रीबी का दंश झेल रहे लोगों को छोड़ दीजिए, महाराष्ट्र में सिर्फ़ गरीबी रेखा से नीचे जिंदगी बसर करने वालों की आबादी तीन करोड़ से ज्यादा है. सरकार कम से कम इनको तो एक समय की रोटी खिला दे. इतनी बड़ी संख्या में सरकारी भोजन की मांग है और सरकार केवल दो लाख थाली दे कर वाह वाही लूटने की कोशिश कर रही है. ये प्रदेश की भूखी जनता के साथ मज़ाक नहीं तो और क्या है? कदम ने कहा कि, अभी तो हम ने खाने की क्वालिटी और क्वांटिटी की बात ही नहीं की है. उन्हों ने कहा कि एम पी जे जन हित में सरकार से इस मुसीबत की घड़ी में प्रदेश में मांग के अनुरूप अविलम्ब शिव भोजन थाली योजना का विस्तार कर के ज़्यादा से ज़्यादा गरीबों के पेट की आग भुझाने का काम करने की अपील करती है. इसके अलावा इस योजना की समय सीमा में भी विस्तार होना चाहिए. दरअसल 26 जनवरी 2020 को जरूरतमंद और गरीब लोगों को कम पैसों में एक वक़्त की रोटी उपलब्ध करने के लिए बतौर पायलट परियोजना शिव भोजन थाली योजना की शुरुआत की गई थी. कोरोना महामारी के चलते लगे पहले लॉकडाउन में सरकार ने 5 रुपये में भोजन उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, जिसे इस लॉक डाउन में एक महीने के लिए मुफ्त कर दिया गया है और इसकी अवधि एक महीने के लिए और बढ़ा दी गई है.

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