आह।हसीब सिद्दीकी साहब। आप फिर याद आ गए।

आह।हसीब सिद्दीकी साहब।
आप फिर याद आ गए।
(कमल देवबन्दी——लेखक,अध्यापक,विचारक

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की इस अज़ीम कायनात में इंसानी जिंदगियों की गिनती करना नामुमकिन सा है—-हां, हज़ारों साल पुरानी इस दुनिया मे यह ज़रूर आसान है के आप इस दुनिया के इतिहास के पन्नो से अच्छे आदमियों,उनके कारनामों को याद कर लो।उनको अपनी ज़िंदगी मे उतार लो,उनके रास्ते इख़्तियार कर लो।
देवबन्द की सुनहरे इतिहास के पन्नों पर हर क्षेत्र में एक नही सैकड़ों ऐसे लोग हुए जिन्होंने अपने कर्मों से पूरी दुनिया को प्रभावित किया।इन्ही में एक बड़ा नाम हज़रत मौलाना हसीब सिद्दीकी साहब का है जो 9 जनवरी 2019 को हमेशा के लिए रुख़सत हो गए थे।
“कितने अच्छे लोग थे,क्या रौनकें थीं उनके साथ——जिनकी रुख़सत ने हमारा शहर सूना कर दिया”।
हसीब साहब।एक फरमाबरदार बेटे,लायक़ शागिर्द,कामयाब अर्थशास्त्री,शिक्षाविद,समाजसेवी,राजनेता और पत्रकार थे।उन्होंने अविरल 50 साल समाज को दिए।उनकी छत्रछाया में मुस्लिम फण्ड,मदनी ITI, मदनी आई हॉस्पिटल,मदनी ड्राइविंग इंस्टिट्यूट,पब्लिक गर्ल्स इंटर कॉलेज,टाइपिंग इंस्टीट्यूट, एम्बुलेंस,मीडिया सेंटर आज वट वृक्ष के रूप में खड़े हैं।इसके अतिरिक्त लगभग 50 विभिन्न संगठनों में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
जाने वाले कब लौटे हैं—–यही कैफ़ियत हसीब साहब की भी है—–क्यूंकि यह दुनिया अमल की है और अमल करने वाले हमेशा दिलों में ज़िन्दा रहते हैं।इसलिए हम सब के दिलों में हसीब साहब हमेशा ज़िन्दा रहेंगे।अहले शहर उनके दरजात बुलन्दी के लिए दुआगो है।

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