यूपी में बेहद कठिन डगर है आम आदमी पार्टी की

पार्टी ने किया है यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव में दिल्ली की तर्ज़ पर उतरने का ऐलान

(शिब्ली रामपुरी)

आम आदमी पार्टी को लगता है कि वह दिल्ली की तरह यूपी के विधानसभा चुनाव में भी सफलता हासिल कर लेगी और इसी को देखते हुए आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव में उतरने का ऐलान किया है.अरविंद केजरीवाल का कहना है कि जिस तरह से उन्होंने दिल्ली में विकास कार्यों की गंगा बहाई वैसा वह यूपी में कामयाबी हासिल करने के बाद यहां पर भी करेंगे.लेकिन क्या यूपी में आम आदमी पार्टी की डगर इतनी आसान है?

दरअसल यूपी की सियासत और दिल्ली की सियासत में जमीन आसमान का अंतर है. वैसे भी आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के बाहर सिर्फ पंजाब राज्य में बेहतर प्रदर्शन किया और बाकी जगहों पर करारी शिकस्त ही हासिल की और कई जगह पर तो आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों को नोटा से भी कम वोट मिले.यदि गंभीरता से देखा जाए तो आम आदमी पार्टी दिल्ली में ही सिमट कर रह गई है और इसकी बड़ी वजह पार्टी के अंदर समय-समय पर पैदा होने वाली आपसी गुटबाजी भी है.कई बार ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं कि दिल्ली में पार्टी के कई नेता किसी मुद्दे पर आपस में ही उलझे हुए नजर आते हैं जिसका सीधा सा नुकसान आम आदमी पार्टी को उठाना पड़ता है. आम आदमी पार्टी ने यूपी की जिम्मेदारी सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को सौंप रखी है और वह यूपी में काफी जोशो खरोश के साथ कार्य कर रहे हैं और लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे हैं प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने विचार रख रहे हैं और वह सबसे ज्यादा भाजपा पर आक्रमक रूख अख्तियार किए हुए रहते हैं. उनके निशाने पर दिल्ली में भले ही कांग्रेस भी रहती हो लेकिन यूपी में सबसे ज्यादा फोकस आम आदमी पार्टी का भाजपा पर है और वह भाजपा के सामने कांग्रेस. समाजवादी पार्टी और बसपा पर इतने आक्रामक हमले नहीं करती जितने कि वह भाजपा को चुनौती देती नजर आती है. इसकी सीधी सी वजह यही है कि आम आदमी पार्टी जानती है कि भाजपा यूपी में सत्ता में है तो ऐसे में उस उस पर सियासी प्रहार करने से पार्टी को बड़ा फायदा मिल सकता है. वहीं दूसरी और जैसे ही पार्टी की ओर से ऐलान किया गया कि वो यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव में ताल ठोकेगी तो ऐसे ही भाजपा नेताओं की ओर से आप को नजरअंदाज करने जैसे बयान भी सामने आए. भाजपा के कई सीनियर नेताओं की ओर से ऐसे बयान सामने आए जिससे यह एहसास हुआ बल्कि उन्होंने तो साफ कहा कि आम आदमी पार्टी का यूपी में कोई खास वजूद नहीं है और वह दिल्ली की तर्ज पर यहां से सफ़लता हासिल करना चाहती है लेकिन दिल्ली की तर्ज पर सियासत करना यूपी में आसान नहीं है. आम आदमी पार्टी यूपी में दिल्ली की तरह मोहल्ला क्लीनिक से लेकर बिजली पानी आदि मुद्दों पर चुनावी मैदान में उतरती दिखाई देती है और इसका एहसास पार्टी ने भी अभी से करा दिया है. क्योंकि वह यूपी में दिल्ली की तर्ज पर किए गए विकास कार्यों का बड़े गर्मजोशी से बखान कर रही है. पार्टी नेता संजय सिंह का कहना है कि जिस तरह से दिल्ली में चिकित्सीय सुविधाओं से लेकर पानी-बिजली आदि की सुविधाएं जनता को दी गई. क्या ऐसा यूपी में नहीं हो सकता है. उनका कहना है कि यदि आम आदमी पार्टी यूपी में सत्ता में आती है तो वह दिल्ली की तर्ज पर ही यहां भी विकास कार्यों की गंगा बहायेगी. वैसे तो आम आदमी पार्टी ने उत्तराखंड में भी अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं लेकिन जहां तक यूपी की बात है तो यूपी के लिए आम आदमी पार्टी को यह समझने की जरूरत है कि यहां पर सियासी जमीन मजबूत करना बेहद मुश्किल है क्योंकि यहां पर आम आदमी पार्टी अभी तक संगठनात्मक तौर पर भी बेहद कमजोर है और उसके साथ यूपी में कोई ऐसा बड़ा चेहरा नहीं है जो कि जनता पर अपना प्रभाव रखता हो और काफी संख्या में जनता को पार्टी के पक्ष में करने की दक्षता हासिल हो. इसलिए आम आदमी पार्टी को यहां पर काफी मेहनत और मशक्कत करने की जरूरत है. तभी वह यूपी में अपना सियासी क़िला खड़ा कर सकेगी. यूपी में आम आदमी पार्टी भले ही भाजपा पर सियासी हमले करके खुद को सुर्खियों में रखने का प्रयास करती हो लेकिन उसे यह भी समझ जाना चाहिए कि यूपी में समाजवादी पार्टी और बसपा भी उसके लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है क्योंकि ये यहां की मज़बूत पार्टीयां हैं और इनका काफी समय तक एक तरह से यूपी में वर्चस्व ही रहा है और आज भी प्रदेश की काफी जनता इन पार्टियों के साथ है. कांग्रेस भले ही यूपी में कमजोर मानी जा सकती है लेकिन सच यह है कि वह भी खुद को मजबूत करने को यहां पर प्रयासरत है और इसकी कमान खुद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने संभाल रखी है.

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