मियां बीबी राजी तो क्या करेंगे काजी’ वाली कहावत अब नहीं चलेगी। काजी होंगे राजी तभी होगी शादी

मियां बीबी राजी तो क्या करेंगे काजी’ वाली कहावत अब नहीं चलेगी। काजी होंगे राजी तभी होगी शादी

गोरखपुर,अब जांच पड़ताल व आपसी रजामंदी की मोहर लगने के बाद ही निकाह जैसी पाकीजा रस्म अदा हो सकेगी। जोर जबरदस्ती का निकाह कबूल नहीं होगा। लड़का-लड़की, दोनों के परिवार वालों की रजामंदी और गवाहों व रिश्तेदारों की मौजूदगी रिश्ते की नींव पुख्ता करेगी। निकाह से पहले लड़का-लड़की के परिवार वालों व गवाहों को आधार कार्ड या अन्य जरूरी दस्तावेज देने होंगे। तब कहीं जाकर काजी निकाह पढ़ाएंगे।

मौजूदा हालात के पेशे नजर काजी-ए-शहर मुफ्ती खुर्शीद अहमद मिस्बाही, मुफ्ती-ए-शहर मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी, नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी, जामा मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह के इमाम मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी व गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर के इमाम मौलाना मो. अहमद निजामी ने निकाह पढ़ाने वाले काजी के लिए एहतियाती व मुफीद मशवरा पेश किया है। जिस पर अमल होने से निकाह का अटूट बंधन मजबूती के साथ रफ्तार पकड़ सकेगा।

जामा मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह के इमाम मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी ने हिदायत दी है कि निकाह से पहले काजी लड़के-लड़की के बारे में जांच पड़ताल कर लें। लड़का व लड़की के मुस्लिम होने पर ही निकाह के लिए तैयार हों। निकाह से पहले दोनों के खानदान के बारे में भी जांच पड़ताल कर लें। उनमें से अगर किसी ने जबरन धर्म परिवर्तन किया है तो बिल्कुल निकाह के लिए तैयार न हों, क्योंकि दीन-ए-इस्लाम में जोर जबरदस्ती जायज नहीं और न ही ऐसा करने से निकाह सही होगा।नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने मशवरा पेश करते हुए कहा कि काजी निकाह से पहले जरुरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड, पासपोर्ट या अन्य पहचान पत्र आदि जांच लें और दस्तावेज की प्रमाणित व हस्ताक्षरित फोटो कापी ले लें। निकाह तंहाई में न किया जाए बल्कि दो गवाहों के अलावा कम से कम 15 से 20 लोगों की मौजूदगी में किया जाए। निकाहनामा पर गवाह और दूसरे लोगों के हस्ताक्षर जरूर ले लें। निकाह नामा संस्था के नाम पर हो, मोहर और पंजीकरण संख्या के साथ।

गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर के इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद निजामी ने मशवरा पेश करते हुए कहा कि निकाह दीन-ए-इस्लाम का एक ऐसा कानून है जिससे दो लोग एक होते हैं। सही निकाह के कुछ तरीके हैं, काजी हो जो निकाह कायम करे, लड़का-लड़की की रजामंदी जो एक मजलिस में हो, उस निकाह के कम से कम दो खास गवाह हों। जहां तक हो सके काजी ही निकाह में खुद वकील बने। निकाह नामे में अभिभावकों की रजजामंदी का कॉलम भी बढ़ाया जाए। हस्ताक्षर फोटो के साथ हो। निकाह नामे में कम से कम दोनों पक्षों के दो-दो रिश्तेदारों की मौजूदगी की शहादत के कॉलम बढ़ाए जाएं।

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