असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का निधन हो गया

असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का निधन हो गया

एनआरसी को लेकर भी खूब चर्चा में रहे तरुण गोगोई. इसके विरोध में उन्होंने याचिका डाली थी और 36 साल बाद फिर से काला कोट पहनकर कोर्ट पहुंचने को लेकर खूब चर्चा बटोरी थी.

असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का निधन हो गया है. उनकी उम्र 84 साल और 8 महीने की हो चुकी थी. उन्होंने गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) में अंतिम सांस ली. लंबे समय से बीमार चल रहे तरुण गोगोई पूरी तरह से लाइफ सपोर्ट पर थे. कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद तरुण गोगोई को गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था.हालांकि उन्हें 25 अक्टूबर को डिस्चार्ज कर दिया गया था. लेकिन इसके बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ी और दो नवंबर को उन्हें फिर से GMCH में भर्ती कराया गया. उनके परिवार में पत्नी डॉली गोगोई, बेटी चंद्रिमा और एक बेटा गौरव हैं, जो कांग्रेस सांसद भी हैं.

2001 से 2016 तक तीन बार असम के मुख्यमंत्री रहे तरुण गोगोई का जन्म 1 अप्रैल 1936 को असम के जोरहाट जिले के रंगाजन टी एस्टेट में में हुआ था. उनके पिता डॉ कमलेश्वर गोगोई रंगाजन टी एस्टेट में डॉक्टर थे. वहीं उनकी माता ऊषा गोगोई कवयित्री थीं. उनके माता-पिता उन्हें प्यार से पुनाकोन कहा करते थे.

तरुण गोगोई की शुरुआती पढ़ाई रंगाजन निम्न बुनियादी विश्व विद्यालय से हुई थी. इसके बाद उन्होंने कक्षा चौथी तक जोरहाट मदरसा स्कूल से की. साल 1949 में वह जोरहाट सरकारी हाई स्कूल चले गए, जहां से उन्होंने 10वीं पास की. उन्होंने जोरहाट जिले के ही जगन्नाथ बरूआ कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और फिर गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री हासिल की.

ऐसे बने राजनीति के माहिर खिलाड़ी

-तरुण गोगोई पहली बार 1968 में जोरहाट के म्युनिसिपल बोर्ड के सदस्य चुने गए.

-गोगोई 6 बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सांसद रह चुके हैं. साल 1971 से 85 तक वह जोरहाट लोकसभा सीट से जीते. इसके बाद 1991 से 96 और 1998-2002 तक उन्होंने कलियाबोर सीट का प्रतिनिधित्व किया. फिलहाल इस सीट से उनके बेटे गौरव गोगोई सांसद हैं.

असम राज्य में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी निभाने वाले तरुण गोगोई ने अपने बिजी समय में से एक खास वक्त बागवानी और किताबों को दिया. उन्हें पढ़ने का हमेशा शौक रहा. इसके अलावा खेलों के प्रति भी उनकी रुचि रही. वो टेनिस और फुटबॉल जैसे गेम पसंद करते थे. वह अखिल असम मोइना परिजात, बच्चों के संगठनों और भारत युवक समाज के पूर्व कोषाध्यक्ष रह चुके हैं. हाल ही में एनआरसी को लेकर भी वो खूब चर्चा में रहे. इसके विरोध में उन्होंने याचिका डाली थी और 36 साल बाद फिर से काला कोट पहनकर कोर्ट पहुंचने को लेकर खूब चर्चा बटोरी थी.

Comments are closed.