सुशांत की मौत के बाद आखिर क्यों नहीं हुई इस मुद्दे पर बात

*सुशांत की मौत के बाद आखिर क्यों नहीं हुई इस मुद्दे पर बात?*

*(शिब्ली रामपुरी)*
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से जिस तरह से मीडिया में खबरें आ रही हैं इंटरव्यू आ रहे हैं. उसने जहां बहुत से लोगों के दिमाग में यह सवाल उठा दिया है कि मीडिया में क्यों इस तरह से इस मामले को इतना तूल दिया जा रहा है और मीडिया के कई लोग तो एक तरह से इस मामले में फैसला देने की भूमिका तक पहुंच चुके हैं. मीडिया ही यह तय करने पर उतारू है कि इस मामले में नायक कौन और खलनायक कौन है? बड़ी अजीब बात लगती है कि मीडिया इस मामले में एक तरह से फैसला करने की भूमिका में आ पहुंचा है और वह यह तय करने पर तुल गया है कि इस मामले में असली कसूरवार कौन है? क्या मीडिया ही यह तय करेगा कि सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या की थी या फिर किसी और वजह से उनकी मौत हुई थी? भारत के कई मुख्य चैनल सुशांत सिंह राजपूत की मौत को शायद टीआरपी के लिए दिखा रहे हैं?
ये वो सवाल है जो सिर्फ हम नहीं कर रहे हैं बल्कि आप सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफार्म पर जाइए तो अनगिनत लोग इस तरह के सवाल उठाते आपको मिल जाएंगे. यह वह लोग हैं जो यह कहते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत का किसे अफसोस नहीं है लेकिन जिस तरह से इस मामले में मीडिया कूद पड़ा है और अनाप-शनाप खबरें दिखाई जा रही है.रोज किसी न किसी पर शक किया जा रहा है उससे क्या हासिल होने वाला है? एक टीवी चैनल ने रिया चक्रवर्ती का इंटरव्यू दिखा दिया तो दूसरा टीवी चैनल उस पर बौखला उठा और बाकायदा उस पर तमाम तरह की बातें कही गई. कहीं इंटरव्यू को फिक्स बताया गया कहीं यह जताने की कोशिश की गई कि रिया चक्रवर्ती का मार्मिक इंटरव्यू जांच को प्रभावित करने के लिए था?
लेकिन अफसोस की बात यह है कि जिस मुद्दे पर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद सबसे ज्यादा बात होने चाहिए थी उस मुद्दे को नजरअंदाज किया गया और वह मुद्दा है मानसिक स्वास्थ्य.
जी हां सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से एक मुद्दा सामने आया वह था मानसिक स्वास्थ्य. जिस पर बहुत ज्यादा बात होनी चाहिए थी क्योंकि देश में बड़ी आबादी किसी ना किसी तरह से मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पीड़ित है या फिर चिंतित है. यदि कोई व्यक्ति यह कहे कि वह मानसिक रोग से पीड़ित है तो क्या समाज उसे गंभीरता से लेता है क्या हमारे देश में मानसिक रोग से पीड़ित कोई व्यक्ति अपनी पीड़ा खुलेआम बता सकता है और बता सकता है तो क्या उसका हर जगह हर जिले में इलाज संभव है? यह वह सवाल है कि यदि जिसका जवाब तलाश किया जाए तो यही बात सामने आती है कि हमारे समाज में मानसिक बीमारियों को लेकर अभी उतनी जागरूकता नहीं है कि जितनी दूसरे देशों में है. यही कारण है कि हर जगह पर इसका इलाज भी संभव नहीं है या फिर ना के बराबर है. मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों में जागरूकता का कितना अभाव है यह इस बात से समझा जा सकता है जब कुछ दिन पहले एक अभिनेत्री ने कहा कि सुशांत की मानसिक स्थिति के बारे में बात होनी चाहिए तो सोशल मीडिया पर उस अभिनेत्री को गालियां देनी शुरू कर दी गई. यहां यह बात काबिले गौर है कि यदि कोई होनहार प्रतिभावान कामयाब और शारीरिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे मानसिक रोग नहीं हो सकता है. कई बार लोग सामने जितना स्वस्थ नजर आते हैं और स्वाभाविक रूप से हंसमुख नजर आते हैं हो सकता है कि वह अंदर ही अंदर उतनी ही तकलीफ का सामना कर रहे हो. सुशांत सिंह राजपूत की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ सका है कि सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या की थी या किसी और वजह से उनकी मौत हुई है लेकिन इस केस ने देश में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक बड़ी समस्या को उजागर किया है जिस पर बात होनी चाहिए. लेकिन अफसोस मीडिया का एक बड़ा तबका सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के हर कारण को तो सामने रख रहा है. कई लोगों पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं. लेकिन मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जिस तरह से गंभीरता से बात होनी चाहिए. टीवी चैनलों पर डिबेट होनी चाहिए वैसा कुछ होता नजर नहीं आ रहा. सुशांत सिंह राजपूत पर काला जादू किया गया उनके बैंक से इतने पैसे निकाले गए और उनका खाना वो बनाता था उनके पीछे यह अभिनेत्री पड़ी हुई थी जिसको उनकी दौलत से लालच था या फिर सुशांत सिंह को इस फिल्म से निकाल दिया गया जिसकी वजह से डिप्रेशन में आ गए आदि तमाम तरह की बातें तो मीडिया में बताइऔर समझाई जा रही हैं दिखाई भी जा रही है लेकिन अफसोस मानसिक स्वास्थ्य के बारे में कोई ऐसी डिबेट या कुछ ऐसा नहीं बताया और दिखाया जा रहा है कि जिससे देश की जनता के अंदर भी जागरूकता पैदा हो और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जो भ्रांतियां हैं जो भ्रामक जानकारियां हैं या जो जागरूकता का अभाव है वह दूर हो सके ऐसा मीडिया को दिखाने की जरूरत है.

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