*अलविदा राहत साहब, जब सहारनपुर के गंगोह में मुशायरे में आए थे ठाकुर अमर सिंह और राहत इंदौरी

*जब सहारनपुर के गंगोह में मुशायरे में आए थे ठाकुर अमर सिंह और राहत इंदौरी*
 *(शिब्ली रामपुरी)*
 बात उन दिनों की है जब काजी रशीद मसूद सहारनपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद थे और क़स्बा गंगोह में ऑल इंडिया मुशायरा हुआ था. मुशायरे का संचालन माजिद देवबंदी ने किया था और बतौर मेहमान उसमें समाजवादी पार्टी के तत्कालीन नेता ठाकुर अमर सिंह थे. जब डॉक्टर राहत इंदौरी ने अपना कलाम सुनाया तो उनके कलाम की खूब तारीफ हुई और यहां तक कि ठाकुर अमर सिंह ने भी उनके कलाम की खूब सराहना की थी. शायरी के साथ साथ मुशायरे में राहत इंदौरी ने उस वक्त एक लतीफा(चुटकुला) भी सुनाया था.जिस पर वहां पर खूब हंसी के फव्वारे फूटे थे. मुशायरा पूरी तरह से कामयाब रहा था और उसमें डॉक्टर राहत इंदौरी ने सबसे ज्यादा प्रशंसा हासिल की थी. अब इसे क्या कहिए कुदरत की मर्जी है कि पहले ठाकुर अमर सिंह का निधन हुआ और उनके कुछ वक्त बाद ही आज राहत इंदौरी भी हम सब को छोड़कर इस दुनिया से रुखसत हो गए. ठाकुर अमर सिंह भी सियासत के महारथी थे और खूब लोकप्रियता उन्होंने हासिल की थी और राहत इंदौरी अदबी महफिलों के बेताज बादशाह थे और उनको शायरी के माध्यम से जो स्थान मिला वह बड़े बड़े शायरों को नसीब नहीं होता. डॉक्टर राहत इंदौरी की शायरी का यह आलम था कि जब भी वह किसी मुशायरे में अपना कलाम सुनाया करते थे तो वहां पर उनको दोबारा सुनने के लिए भी पुकारा जाता था. राहत इंदौरी ज्यादातर शायरी वर्तमान हालात पर करते थे और यही बात थी कि वह अपनी शायरी के माध्यम से लोगों के दिलों में उतरने का हुनर रखते थे. आज वह जिस तरह से छोड़ कर चले गए सोचा भी नहीं था कि राहत इंदौरी अचानक कोरोना से संक्रमित  होकर अस्पताल में भर्ती होंगे और वहां पर दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो जाएगा लेकिन कुदरत के आगे किसी की नहीं चलती और मौत एक ऐसा सत्य है कि जिसका सामना सबको करना है. डॉक्टर राहत इंदौरी अपनी शायरी के माध्यम से हमेशा याद किए जाएंगे और उनकी शायरी हमेशा सराही जाती रहेगी. *अलविदा राहत साहब*

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