*कोरोना महामारी में आर्थिक संकट से जूझता प्रिंट मीडिया–बेरोज़गार होते पत्रकार*

*कोरोना महामारी में आर्थिक संकट से जूझता प्रिंट मीडिया–बेरोज़गार होते पत्रकार*

*समाचार पत्रों को देखकर ही लगाया जा सकता है आर्थिक संकट का अंदाजा*

*(शिब्ली रामपुरी)*
कोरोना महामारी का असर मीडिया जगत पर भी पड़ा है. प्रिंट मीडिया की बात करें तो प्रिंट मीडिया पर तो महामारी का सबसे ज्यादा असर पड़ा है और यहां पर जहां काफी पत्रकारों की नौकरीयां गई हैं वहीं कई समाचार पत्रों के सामने तो अपना अस्तित्व बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है. इसका अंदाजा कई समाचार पत्रों को देखने से ही लग जाता है. कई दिन पूर्व की बात है हमारे एक मित्र ने एक समाचार पढ़ते हुए कहा कि देखिए समाचार पत्र के पेज भी कम हो गए हैं और रेट भी बढ़ा दिए गए हैं. वह एक समाचार पत्र पढ़ रहे थे जिसकी कीमत में बढ़ोतरी हुई और उसके पेजो की संख्या भी पहले से कम थी. सबसे अधिक आर्थिक संकट का सामना उन समाचार पत्रों को करना पड़ा है जिनको मक़ामी एवं क्षेत्रीय कहा जाता है. इन समाचार पत्रों के सामने बड़े-बड़े समाचार पत्रों के आगे खुद के अस्तित्व को बनाए रखना और बचाए रखना पहले ही बड़ी चुनौती थी. कोरोना महामारी के दौर में तो इनके सामने काफी परेशानियां बढ़ चुकी हैं. इन छोटे एवं मझोले समाचार पत्रों की ही क्या बात करें मौजूदा दौर में तो बड़े बड़े नामी अखबारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो चुका है. यदि इस दौर को प्रिंट मीडिया का सबसे बुरा दौर कहा जाए तो यह किसी भी तरह से गलत नहीं होगा क्योंकि अब प्रिंट मीडिया को भारी परेशानियों के दौर से गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है. मीडिया जगत में नौकरियां जाने का सिलसिला लगातार जारी है. कई बड़े समाचार पत्रों ने अपने कई एडिशन बंद कर दिए हैं या फिर उनमें पत्रकारों की छंटनी कर दी है. लॉकडाउन शुरू होने के बाद से बड़ी संख्या में पत्रकारों की नौकरियां जा चुकी है एवं बहुत सारे पत्रकारों के वेतन में कटौती कर दी गई है. पत्रकारों के सामने कितनी परेशानियां हैं इसका उदाहरण मशहूर समाचार पत्र द हिंदू के बारे में आ रही हालिया खबर से लगाया जा सकता है. द हिंदू समाचार पत्र के मुंबई ब्यूरो में 20 पत्रकारों को इस्तीफा देने और ब्यूरो की संपादकी जिम्मेदारियां कम करने को कहा गया है. यह अखबार 142 साल पुराना अखबार है. देश के नामी समाचार पत्रों में इस समाचार पत्र का शुमार किया जाता है. खबर आ रही है कि आर्थिक संकट की वजह से इसका मुंबई संस्करण बंद होने जा रहा है. ऐसा ही फैसला समाचार पत्र के कर्नाटक और तेलंगाना ब्यूरो में भी लिया गया है. इससे पहले देश के कई और प्रमुख समाचार पत्रों से भी ऐसी खबरें आ चुकी हैं कि वहां से भी कई पत्रकारों को नौकरी से हटा दिया गया है और जो पत्रकार काम कर रहे हैं उनके वेतन में कटौती कर दी गई है. कई जानकारों का मानना है कि प्रिंट मीडिया के लिए यह सबसे बुरा दौर चल रहा है और आगे भी प्रिंट मीडिया इस तरह की काफी चुनौतियों से जूझता रहेगा. प्रिंट मीडिया को इन समस्याओं से निकालने के लिए सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना होगा और वक्त रहते ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे प्रिंट मीडिया अपना अस्तित्व बचाने में कामयाब रह सके. यहां यह बात भी काबिले जिक्र है कि सिर्फ पत्रकार ही मीडिया में काम नहीं करते हैं बल्कि बहुत से ऐसे लोग हैं जो पर्दे के पीछे से काम करते हैं. जैसे ऑफिस का स्टाफ हुआ अखबार छापने वाले लोग हुए आदि लोग भी मीडिया से जुड़े हुए कर्मचारी होते हैं. ऐसे में यदि मीडिया के सामने आर्थिक रूप से बड़ा संकट खड़ा होता है तो इन लोगों के जीवन पर भी असर पड़ना लाजमी है. जाहिर सी बात है कि एक बड़ी संख्या में पत्रकारों के साथ यह कर्मचारी भी बेरोजगारी का सामना करेंगे. भारत में प्रिंट मीडिया की हमेशा से काफी अहमियत रही है और इस क्षेत्र में काफी उम्मीदें भी. लेकिन यह उम्मीदें भविष्य में दम तोड़ती नजर आ रही हैं क्योंकि मीडिया जगत के सामने विशेष तौर पर प्रिंट मीडिया जगत के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो चुका है और फिलहाल प्रिंट मीडिया इससे बाहर निकलता नजर नहीं आता.

उत्तराखंड में प्रिंट मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार डॉ जमशेद उस्मानी कहते हैं कि आज के दौर में यदि कोई समाचार पत्र लगातार निकाल रहा है तो हम उसकी हिम्मत और हौसले की तारीफ करते हैं क्योंकि आज के दौर में सबसे मुश्किल कार्य समाचार पत्र लगातार प्रकाशित करना है. समाचार पत्र प्रकाशित करना पहले ही बड़ी चुनौती थी लेकिन वर्तमान समय में जब से कोरोना महामारी का संकट शुरू हुआ है तब से तो प्रिंट मीडिया के सामने एक नहीं कई तरह की परेशानियां खड़ी हो गई है ऐसे में समाचार पत्रों का अस्तित्व बचाए रखना खुद के लिए बड़ी चुनौती है. जमशेद उस्मानी स्पष्ट तौर पर कहते हैं कि प्रिंट मीडिया के सामने कितना संकट है यह आप लगातार पत्रकारों की नौकरियां जाने के मामलों से ही अंदाजा लगा सकते हैं.

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