चीन ने फिर कहा कि कोरोना वायरस अमरीका ने बनाया, पोम्पेयो ने दी चेतावनी कि अफ़वाहें न फैलाए बल्कि मिलकर काम करे बीजिंग!

चीन ने एक बार फिर कोरोना वायरस के मामले में अपना गंभीर आरोप दोहराते हुए कहा है कि कोरोना वायरस सन 2015 में अमरीकी वैज्ञानिकों ने बनाया था और इसके ठोस प्रमाण मौजूद हैं।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शाओ लीजियान ने कहा कि साक्ष्यों से ज़ाहिर है कि अमरीकी इंटैलीजेंस सीआईए ने कोरोना वायरस फैलाया है।

इससे पहले भी लीजियान ने कहा था कि कोरोना वायरस अमरीकी सैनिक अपने साथ वुहान लाए थे। साथ ही उन्होंने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा था कि अमरीका बताए कि उसके यहां कोरोना संक्रमण का पहला मामला कब सामने आया, कोरोना के बीमारों को किन अस्पतालों में रखा गया? उन्होंने ज़ोर दिया कि अमरीका पर एक स्पष्टीकरण उधार है।

चीन की ओर से यह गंभीर मामला उठाए जाने पर अमरीकी सरकार बौखला गई है। अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने सोमवार को चीन की सत्ताधारी पार्टी के विदेशी मामलों के अधिकारी यांग जेशी से टेलीफ़ोनी वार्ता में चेतावनी दी कि यह समय गुमराह करने वाली बातें और अफ़वाहें फैलाने के लिए उचित नहीं है बल्कि यही समय है कि सारे राष्ट्र इस संयुक्त ख़तरे से निपटने के लिए अपने प्रयासों को एकजुट और समन्वित करें।

ज्ञात रहे कि अमरीका ने कोरोना वायरस के बारे में उपलब्ध जानकारियां चीन को दी थीं जिनकी समीक्षा के दौरान चीनी विशेषज्ञों ने अमरीकी मैगज़ीन नेचर मेडिसिन में 2015 में छपा एक लेख निकाला जिसमें बताया गया है कि अमरीकी अधिकारियों ने नए प्रकार का कोरोना वायरस खोज लिया है जिसका इंसानों पर सीधा असर होता है।

लेखक ने इसमें बताया है कि कोविड-19 वायरस एसओसीओ-14 नामक वायरस से निकला है जो चमगादड़ में पाया जाता है।

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