राज्यसभा ही जाना था तो नेता बनते गोगोई, जज क्यों बने: जस्टिस पटनायक

वहीं सुप्रीम कोर्ट के एक और पूर्व जज जस्टिस ए के पटनायक ने कहा है कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए किसी भी सीजेआई को न तो चुनाव लड़ना चाहिए और न ही उन्हें राज्यसभा आदि के लिए नामित होना चाहिए। उन्होंने कहा, “मुझे समझ नहीं आ रहा है कि पूर्व सीजेआई को राज्यसभा के लिए नामांकन क्यों स्वीकार करना चाहिए या चुना जाना चाहिए। उसकी वहां कोई भूमिका नहीं है। न तो किसी राष्ट्रपति को पूर्व सीजेआई को नियुक्त करना चाहिए और न ही उसे स्वीकार करना चाहिए। इस तरह से संस्थानों को बचाया जाता है और एक जज को गरिमा के साथ रिटायर होना चाहिए।”

जस्टिस पटनायक ने कहा कि, “हमें संस्थानों की स्वतंत्रता और शुद्धता बनाए रखना है। कोई इनका घालमेल नहीं कर सकता। यदि सरकार को किसी कानूनविद की जरूरत थी तो बहुत से लोग हैं जो इस काम को कर सकते थे। कई वकील और कानूनी शिक्षाविद हैं, जिन पर विचार किया जाना चाहिए था।“ जस्टिस पटनायक ने पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई के खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न मामले की जांच करने वाले पैनल की अध्यक्षता की थी।

पटनायक ने कहा कि “गोगोई ने न्यायपालिका को चुना था ताकि वे गरिमा और सम्मान के साथ सेवानिवृत्त हो सकें। अगर वे नेता ही बनना चाहते थे तो उन्हें अपना करियर पहले से तयकरना चाहिए अगर वह एक राजनेता बनना चाहते थे। राज्यसभा के सदस्यों की एक महान भूमिका होती है, लेकिन न्यायपालिका की भी अपनी भूमिका है।“

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