आस्था पर भारी कोरोना वायरस का खतरा, हिमाचल के विश्व प्रसिद्ध मंदिरों के कपाट बंद, कारोबार को भारी नुकसान

चिंतपूर्णी और ज्वाला जी मंदिर में रोज हजारों की तादाद में श्रद्धालु पूरे देश से आते हैं। मेले के दिनों में यह संख्या लाखों में होती है। यहां विदेशों से भी लोग पहुंचते हैं। नवरात्र में तो यहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कई-कई किलोमीटर लंबी लाइनें लगती हैं।

कोरोना वायरस के खतरे के मद्देनजर 17 मार्च को हिमाचल प्रदेश स्थित विश्व प्रसिद्ध दो शक्तिपीठ मंदिर माता चिंतपूर्णी और ज्वालाजी के कपाट भी बंद कर दिए गए। बड़े धार्मिक स्थल बंद करने का देश में यह पहला मामला है। दोनों मंदिर सैकड़ों साल पुराने हैं और दुनिया भर से श्रद्धालु यहां आते हैं।

ऐसा पहली बार हुआ है कि इन मंदिरों के कपाट बंद किए गए हों। हिमाचल सरकार ने इन्हें बंद करने के आदेश दिए हैं। सोमवार की शाम जो श्रद्धालु चिंतपूर्णी और ज्वाला जी आए थे, मंगलवार को उन्हें सुबह 9 से 10 बजे तक ही मंदिरों में ठहरने की इजाजत दी गई। उसके बाद कपाट बंद कर दिए गए। अब वहां सिर्फ पुजारी रहेंगे। पुजारियों की ओर से रोजमर्रा की रस्में और पूजा आदि पहले की तरह की जाएगी। ऊना के उपायुक्त संदीप कुमार के मुताबिक जब तक कोरोना वायरस का खतरा बरकरार है, तब तक मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे।

गौरतलब है कि चिंतपूर्णी और ज्वाला जी में प्रतिदिन हजारों की तादाद में श्रद्धालु पूरे देश से आते हैं। मेले के दिनों में यह संख्या लाखों में होती है। विदेशों से भी लोग पहुंचते हैं। 25 मार्च से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। नवरात्रों में यहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कई-कई किलोमीटर लंबी लाइनें लगती हैं। चिंतपूर्णी और ज्वाला जी के इतिहास में यह पहली बार होगा कि नवरात्र के दिनों में श्रद्धालु मंदिरों में नहीं जा पाएंगे और मेला भी नहीं लगेगा।

यहां लगने वाले मेलों में बड़े बाजार सजते हैं। पंजाब के सैकड़ों छोटे-बड़े कारोबारी वहां स्टॉल और दुकानें लगाते हैं। जालंधर से मेलों के दौरान चिंतपूर्णी जाकर मनियारी का स्टॉल लगाने वाले मुकेश कुमार खन्ना ने बताया कि उन्होंने नवरात्र मेले में स्टॉल के लिए डेढ़ लाख रुपए का सामान थोक में खरीदा था। अब मंदिर बंद हो जाने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

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