देश वासियों की सेवा में जमात-ए-इस्लामी हमेशा सक्रीय रहती है – सैयद ज़मीर कादरी
January 27, 2020
महाराष्ट्र सरकार मौलाना आज़ाद आर्थिक विकास महामंडल को तुरंत ५०० करोड़ रुपया दिया जाए वरना मौलाना आज़ाद आर्थिक विकास महामंडल को ताला लगाया जाएगा : शमशेर खान पठान
March 6, 2020

फूंकों से ये चिराग बुझाया ना जाएगा

फूंकों से ये चिराग बुझाया ना जाएगा
डाक्टर सलीम खान
2 फरवरी 2020 को योगी नाम के ढोंगी ने दिल्ली में ऐलान किया कि अगर बोली से नहीं समझे तो गोली से समझ जाऐंगे । योगी के ऐलान से जोश में आकर कपिल गुज्जर नाम का एक नौजवान शाहीन बाग पहुंच गया और भारत माता की जय का नारा लगा कर हवाई फायर करने लगा । वहां मौजूद मुज़ाहिरीन पर तो कोई असर नहीं हुआ मगर इंटरनेशनल हिंदू महासभा के अध्यक्ष को लखनऊ में गोलीमार कर हलाक कर दिया गया । उसी दिन साकेत गोखले नामी एक आरटी आई कार्यकर्ता ने ऐवान पार्लीमान के पास मुजाहरा करके मर्कजी वजीर अनुराग ठाकुर का वजा करदा ‘‘देश के गद्दारों को, गोली मरो सालों को’’ वाला नारा बुलंद करते हुए जलूस निकालने की इजाजत मांगी तो पुलिस ने उसे उस की इजाजत दे दी । 2 फरवरी ही के दिन उतर प्रदेश के बारह बंकी जिला में अखिलेश नामी दरिन्दा अपनी बीवी का कटा हुआ सर लेकर बहादुर पूर गावं के जहांगीर आबाद पुलिस थाने पहुंच गया। थानेदार ने जब उस से सर लेने की कोशिश की तो वो देश भक्त कौमी तराना गाने के बाद भारत माता की जय का नारा लगाने लगा। बजाहिर मुतफर्रिक नजर आने वाले ये वाक़ियात बाहम मरबूत हैं । इन सब के पीछे अदम बर्दाश्त की जेहनियत और उसको हासिल क़ौम परस्त हुकूमत की पुश्तपनाही है।
वजीर-ए-आला के अहम ओहदे पर फाइज होने के बावजूद योगी गोली और बोली की जुबान का इस्तेमाल करना उनकी बीमार जेहनियत का गम्माज है। ये वही योगी है जिसने ऐवान पार्लीमान में रो-रो कर स्पीकर सोमनाथ चटर्जी से कहा था कि ‘‘मुझे बचा लीजीए, वे लोग मुझे मार डालेंगे’’। रुकन पार्लीमान होने के बावजूद योगी के भरी मजलिस में बिलख बिलख कर रोने की वजह ये थी कि वो ‘‘गोली की बोली’ समझ कर डर गए थे। अब वे मुस्लमानों को इसी जुबान में धमकाने की कोशिश कर रहे हैं । बिलरिया गंज के जोहर पार्क में मुजाहिरा करने वाली ख़वातीन पर रात 3 बजे पुलिस के जरीया लाठी चार्ज और पत्थरबाजी इसी बुजदिलाना हिक्मत-ए-अमली का नतीजा है। योगी और उसकी पुलिस को अपने वक़ार का जर्रा बराबर भी खयाल होता तो वो इस तरह शब-खून मारने की बुजदिली से गुरेज करते लेकिन जिसकी अपनी कोई इज्जत ही ना हो उस को ये एहसास क्या माना ? लखनऊ की सर्द रात में मुजाहरा करनेवाली खवातीन से खाना और कम्बल छीन लेना । उस के बाद आजम गढ़ में मुजाहिरीन पर रात के आखिरी पहर में हल्ला बोल देना ये साबित करता है कि भगवाधारी किस कदर बुजदिल और सफ्फाक होते हैं । इस तरह उन लोगों ने अपने चेहरे पर पड़ा संस्कार के जाली मुखौटे को अजखुद नोच कर फेंक दिया है लेकिन इस से अहले ईमान का हौसला पस्त नहीं होगा क्योंकि बकौल मौलाना जफर अली खान
नूरे खुदा है कुफ्र की जुलमत पे खंदाजन
फूंकों से ये चिराग बुझाया ना जाएगा
एक तरफ तो खवातीन के शाहीन बाग को देखकर उन बदबख्तों की नानी मर जाती है और उस को हटाने के लिए जाफरानी दहश्तगर्द अदालते उज़्मा में पहुंच जाते हैं तो दूसरी तरफ साकेत गोखले नाम का आरटी आई कार्यकर्ता जिसने वजारते दाखिला से टुकड़े टुकड़े गैंग से मुताल्लिक मालूमात तलब करके वजीर-ए-दाखिला की धोती खींच ली थी दिल्ली पुलिस से जलूस निकालने की इजाजत हासिल करके बड़ी खूबी के साथ हुकूमत के दोगला पन को बेनकाब कर देता है। उसने अपनी दरखास्त में वाजह तौर पर लिखा था कि 2 फरवरी के दिन शाम 5 ता 7 बजे के दौरान जंतर मंतर के नुक्कड़ से टाल्स्टाय रोड होते हुए पार्लीमेंट स्ट्रीट पुलिस थाने तक जलूस जाएगा । इस में शामिल 100 अफराद (दिल्ली की इंतिखाबी मुहिम में मर्कजी वजीर अनुराग ठाकुर के जरिया वजा करदा ’’देश के गद्दारों को गोली मॉरो सालों को’’ का नारा लगाएंगे । इलेक्शन कमीशन ने तो अनुराग ठाकुर की इंतिखाबी मुहिम पर इस इश्तिआल अंगेजी के सबब आरिजी पाबंदी लगा दी लेकिन दिल्ली की पुलिस ने उस पर एतराज करने के बजाय इजाजत देदी । उस का मतलब ये है कि जिस दिल्ली में शाहीन बाग के पुरअम्न मुजाहिरे पर लोग नाक भौं चढ़ा रहे हैं । जिस मुल्क में रात के तीसरे पहर खवातीन के एहतिजाज पर शब-खून मारा जाता है वहीं ऐवान पार्लीमान की नाक के नीचे ‘‘देश के गद्दारों को गोली मारो सालों को’’ का इश्तिआल अंगेज नारा लगा कर जलूस निकालने की सरकारी इजाजत मिल जाती है।
दिल्ली के अंदर अनुराग ठाकुर के जरिया तशद्दुद की तरगीब का एक असर तो ये हुआ है कि कपिल गुर्जर जैसा बदमाश पिस्तौल लेकर शाहीन बाग पहुंच गया और भारत माता की जय का नारा लगा कर हवाई फायर करने लगा । पुलिस ने उस पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय तफतीश की आड़ में सियासत शुरू कर दी। इस पर आप की जानिब से जाबिता-ए अख़लाक़ की खिलाफवरजी की शिकायत दर्ज कराने पर इलैक्शन कमीशन को पुलिस से जवाबतलब करना पड़ा लेकिन कोई गिरफ्तारी वगैरा नहीं हुई जबकि मुंबई में स्टूडैंटस इस्लामिक आर्गेनाईजेशन के सद्र सलमान अहमद पर इश्तिआल अंगेजी का इल्जाम लगाकर उन्हें हिरासत में ले लिया गया। सलमान को मातूब करने के लिए उनकी एक तकरीर को सयाक व सबक से काट कर पहले तो मीडीया में उछाला गया और फिर एक एफ आई आर दाखिल करके ये जालिमाना कार्रवाई की गई हालांकि अगर इंतिजामिया पूरी तकरीर को दरुस्त तनाजुर में सुन लेता तो इसकी नौबत ही नहीं आती। ये भी सरकार की जानिब से हौसलाशिकनी की एक कबीह कोशिश है।
दिल्ली के कपिल गुर्जर की बुजदिलाना हरकत और ये ऐलान कि ‘हमारे मुल्क में और किसी की नहीं चलेगी, सिर्फ हिंदूओं की चलेगी।’ नीज ‘‘अपने ही मुल्क में हम कब तक दब कर रहेंगे’’ ये साबित करने के लिए काफी है कि इस की तर्बीयत संघ की शाखा में हुई है। पहले तो बी जे पी ने जामिया और शाहीन बाग पर हमला करने वालों से हमदर्दी जता कर हिंदू इंतिहा पसंदों की हिमायत हासिल करने की कोशिश की लेकिन जब देखा कि इस से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो रहा है तो कपिल गुर्जर को आप का रुकन बना दिया और संजय सिंह के साथ उसकी तस्वीर शाया कर दी मगर कपिल गुर्जर के वालिद गजे सिंह ने एक बयान देकर बी जे पी के गुब्बारे की हवा निकाल दी । उन्हों ने वाजह किया कि उनका या घरवालों में से किसी का भी आप से कोई ताल्लुक नहीं है। वो 2012 तक बी एस पी में थे उस के बाद सियासत से किनारा-कश हो गए । बी जे पी अगर इस खयाल-ए-खाम में मुबतला है कि उम्मत इस झूठे प्रोपगंडे का शिकार हो कर केजरीवाल की दुश्मन हो जाएगी तो 8 फरवरी को फिर एक-बार दिल्ली के मुस्लमान उस की ये गलतफहमी दूर कर देंगे। इस मुल्क का मुस्लमान दीगर अह्ले वतन की मानिंद सयासी अहमक नहीं है। वो अपने जजबात का इजहार तो करता है लेकिन जजबात की रो में बहने के बजाय वोट देते समय अक़्ल का इस्तेमाल भी खूब करता है। ऐवान पार्लीमान में एन आर सी और एन पी आर पर मोदी सरकार अपना कदम पीछे हटाने लगी है बईद नहीं कि बहुत जल्द इस से पूरी तरह तायब भी हो जाए । ऐसा करने में ही उस की भलाई है वर्ना वो खुद अपना खसारा करेगी।

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