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शहरियत तरमीम कानून ने अमित शाह की पोल खोल दी

शहरियत तरमीम कानून ने अमित शाह की पोल खोल दी

डाक्टर सलीम खान

शहरियत तरमीमी कानून पर वजारते दाख़िला का ताजा बयान मुजाहिरीन की कामयाबी का वाजिह इशारा है । वजारत ने कहा है कि इसके मुसव्वदे पर गौर किया जा रहा है। साथ ही एहतिजाज करने वालों से भी सुझाव मांगा गया । यानी कल तक जिनको योगी जी शरपसंद फसादी कह रहे थे या शाह जी बहकावे में आने वाले लोगं बता रहे थे आज उनसे मश्वरा तलब किया जा रहा है। इस बयान ने अमित शाह की इस ताकतवर छवि को मालिया-मेट कर दिया है जिसके बारे में कहा जाता था कि वो मोदी से भी ज्यादा सख़्त हैं और किसी सूरत झुक नहीं सकते इसलिए कि वजारते दाख़िला ने बयान देने की ये वजह बताई है कि हालात काबू से बाहर ना होजाएं।
इस से पहले लाल कृष्ण अडवानी को लौह पुरुष कहा जाता था लेकिन वो तो मोदी के सामने कपास बन गए और फिर अमित शाह में हवा भरी गई जो मुजाहिरीन ने शहरियत तरमीम कानून पर एहतिजाज करके निकाल दी । अमित शाह को अस्रे हाजिर का चाणक्य भी कहा जाता है। उनके बारे में ये दावा किया जाता है कि वो निहायत चालाक इन्सान हैं और अवाम की नब्ज पहचानते हैं। शहरियत के कानून में तरमीम करने की असल वजह आसाम के सूबाई इंतिखाब में अपनी पकड़ मजबूत करना था क्योंकि उस सूबे में एन आर सी का दावं उल्टा पड़ चुका था। इस रजिस्टर के अंदर बंगाली बोलने वाले हिन्दुवों की अक्सरीयत की नाराजगी से बचने के लिए पहले तो एन आर सी को सूबाई हुकूमत ने मुस्तर्द कर दिया। नए सिरे से एन आर सी करने के फैसले ने बंगाली बोलने वाले इन हिन्दुवों को अंदेशों का शिकार कर दिया जिनके नाम पहले रजिस्टर में शामिल हो चुके थे और ऊपर से आसामी बोलने वाले मुकामी लोग भी नाराज हो गए।
इस तरह भाजपा की आसाम में ना खुदा ही मिला ना विसाल सनम वाली हालत बन गई। ऐसे में बंगाली बोलने वालों को फरेब देने के लिए सी ए बी का फरेब रचा गया लेकिन मुकामी आबादी के बिफर जाने का अंदेशा मौजूद था इसलिए अमित शाह ने बिल मंजूर कराने से पहले उत्तर पूर्वी राज्यों की सैकड़ों तन्जीमों से मुलाकात की लेकिन अवाम का मूड नहीं जान सके और कानून बनाकर फंस गए। आसाम और उस के पड़ोसी सूबों ने वजीरे दाख़िला और वजीरे आजम को इस कदर खौफजदा कर दिया है कि वो वहां जाकर अवाम को समझाने के बजाय दिल्ली से ट्वीट करने पर बस कर रहे हैं जबकि वहां इंटरनैट की खिदमात बंद हैं और वो पैगामात जिनके लिए लिखे जा रहे हैं उनके सिवा सब पढ़ रहे हैं और हंस हैं।
माजी में जब भी इंतिखघबात के समय शाह जी के हाथ बटेर लग जाती थी या वो साम, दाम ,दंड, भेद के गैर अखलाकी हरबे इस्तिमाल करके कामयाब हो जाते थे तो इस को मीडिया खूब बढ़ा चढ़ा कर पेश करता था लेकिन सी ए बी ने उनकी पोल खोल कर रख दी । इस काले कानून के खिलाफ जब उत्तरपूर्व में आतिश-फिशाँ फूटा तो वो हक्का बका रह गए और खिसियानी बिल्ली की तरह लगे खंबा नोचने और अवाम के गम व गुस्से पर मरहम रखने के बजाय विपक्ष पर इल्जाम तराशी करने लगे । वो भूल गए कि ऐसा करके वो अवाम को मूर्ख करार दे रहे हैं और ये कह रहे हैं कि आम लोग बड़ी आसानी से किसी के बहकावे में आ जाते हैं । लोगों के जज्बात को जब इस तरह मजरूह किया जाये तो इंतिखाब के समय सबक सिखाते हैं और भाजपा जल्द ही देख लेगी।
सी ए ए या एन आर सी के बारे में अमित शाह की सफाई बेहद मजहकाखेज है। उनका कहना ये है कि शहरियत का कानून हिन्दुस्तानी मुस्लमानों के खिलाफ नहीं है और इसको एन आर सी से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए । अब सवाल ये है कि इन दोनों को मिलाने का काम किस ने किया ? इस सवाल का सीधा जवाब ये है कि खुद अमित शाह ने बार-बार इन दोनों को जोड़ने की गलीज हरकत की है। वो बंगाल के अंदर बारहा अवामी खिताब में ये कह चुके हैं कि शहरियत बिल में तरमीम करने के बाद ही एन आर सी तैयार किया जाएगा और किसी हिंदू का बाल बीका नहीं होगा। इस तरह के बयानात पर जब तक लोग तालियाँ बजाते रहे तो शाह साहब बगलें बजाते रहे लेकिन जब अवाम ने एहतिजाज शुरू कर दिया तो उनके होश ठिकाने आ गए। शरारत कर गुजरने के बाद शराफत का ढोंग रचाना काम आता।
अमित शाह को दूसरा एतराज है कि इस बाबत अफ्वाह फैलाई जा रही है और अवाम को गुमराह किया जा रहा है। इस बयान में भाजपा के मशहूरे जमाना आई टी सेल की नाकामी का बिलावासिता एतराफ मौजूद है । मुल्क में झूठ फैलाने की सबसे बड़ी दूकान तो खुद भाजपा ने खोल रखी है। इस की वजीर स्म्रती ईरानी ऐवान पार्लीमान में डंके की चोट पर राहुल गांधी का बयान तोड़ मरोड कर पेश करती हैं । जे एन एव के तलबो पर तोहमत बाजी की वीडीयो पर दूसरी आवाज चिपकाने का काम वजाराते इंसानी वसाइल यानी तालीम की वजारत में होता है। इस के बावजूद विपक्ष अवाम को गुमराह करने में कामयाब हो जाएगी और ये डीजीटल फौज देखती रह गई इस से ज्यादा शर्मनाक बात और क्या हो सकती है?
अमित शाह और उनके उस्ताद नरेंद्र मोदी पहले कहा करते थे जो काम कांग्रेस ने 70 साल में नहीं किया हमने 70 दिन में कर दिया लेकिन अब शाह जी अपनी बचाव में नहरू लियाकत पैक्ट का हवाला देते हैं और कहते हैं कि इन दोनों ने अपने अपने मुल्क में अकलीयतों को तहफ्फुज देने की बात की थी । ये बात दरुस्त है लेकिन पण्डित नहरू के हर फैसले को कौम दुश्मन करार देने वाले वजीरे दाख़िला की जबान से पण्डित नेहरू की तारीफ हैरत-अंगेज है। इस मुआहिदे में अपने देश के अंदर अकलीयतों के तहफ्फुज की बात थी जबकि भाजपा ने इस की खिलाफवरजी करते हुए अव्वल तो हिन्दुस्तान के अंदर अकल्लीयत का जीना दूभर कर रखा है और गैर ममालिक की अकल्लीयतों के लिए टेसुवे बहा रही है। शाह जी ने इंदिरा जी के जरीया लाखों श्रीलंकन हिन्दुवों को शहरीयत देने का भी जिक्र किया लेकिन ये नहीं बताया कि वो खुद श्रीलंका से आनेवाले एक लाख दो हजार हिन्दुवों को शहरीयत क्यों नहीं देते। शाह जी ने एक इंटरव्यू में राजीव गांधी के आसाम मुआहिदे का हवाला देकर कहा कांग्रेस ने अपने वोट बैंक के लिए इस पर अमल नहीं किया। ये इल्जाम दरुस्त है लेकिन भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट के हुक्म में तैयार किए जानेवाले एन आर सी को मुस्तर्द करके राजीव गांधी के आसाम मुआहिदे की जो धज्जियाँ उड़ाई हैं इस को दिया।
इस तरह शाह जी ने खुद ही विपक्ष के इस इल्जाम को तस्लीम कर लिया कि ये सरकार पुरानी शराब को नई बोतल में परोसने के सिवा कुछ नहीं करती । ताज्जुब की बात ये है कि जिस काम के लिए पुरानी हुकूमतों को बुरा-भला कहा जाता उन्हीं को दोहरा कर इस पर गर्व किया जाता है। ये मुनाफकत की आला तरीन शक्ल है। ये हकीकत है कि बहुत सारे मामलात में कांग्रेस ने जो किया था वही भाजपा कर रही है मगर फर्क ये है कि पहले वाले हर फैसले का सियासी फायदा उठाने की कोशिश नहीं करते थे मगर भाजपा का ये हाल है कि राई का पहाड़ बनाती है और इस से सियासी व जज्बाती इस्तिहसाल करती है। शहरीयत के तरमीमी कानून पर भाजपा के नए मद्दाह और मारूफ सहाफी राजदीप सरदेसाई ने यही कहा कि वो इस से हिंदू वोट बैंक को मजबूत करने के फिराक में है लेकिन सरदेसाई ने ये भी कहा कि भगवायी इस साजिश में कामयाब नहीं होंगे। मआशी मंदी और बेरोजगारी के आगे राम मंदिर और सी ए ए ढेर हो जाएंगे। इस कानून के खिलाफ मुल्क गीर एहतिजाज ने राजदीप सरदेसाई की बात पर मुहर जगा दी है ।

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